केदारनाथ धाम में हेलीकॉप्टर की आपात लैंडिंग, बाल-बाल बचे 5 तीर्थ यात्री – Vistrit News

केदारनाथ धाम में हेलीकॉप्टर की आपात लैंडिंग, बाल-बाल बचे 5 तीर्थ यात्री

केदारनाथ धाम के लिए उड़ान भर रहे हेलीकॉप्टर की सोमवार दोपहर को आपात लैंडिंग करनी पड़ी। गुप्तकाशी से केदारनाथ धाम के लिए उड़ान भर चुके चॉपर की आपात लैंडिंग की वजह से पांच तीर्थ यात्रियों की जान बाल-बाल बच गई। खराब मौसम  की वजह से भारत ट्रांस एविशन के हेलीकॉप्टर की गरूड़चट्टी के पास आपात लैंडिंग की गई ।

एचटी रिपोर्ट के अनुसार, रुद्रप्रयाग के जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी एनएस राजवर ने बताया कि हेलीकॉप्टर दोपहर 2.06 बजे गुप्तकाशी हेलीपैड से रवाना हुआ था और इससे पहले कि वह केदारनाथ हेलीपैड पर उतर पाता, कम दृश्यता की वजह से हेलीकॉप्टर की आपात लैंडिंग करनी पड़ी।  हेलीकॉप्टर के पायलट ने अपनी सूझबूझ का परिचय देते हुए गरुड़ चट्टी के पास सुरक्षित लैंडिंग की, जिससे पांच पर्यटकों की जान बच गई।

राजस्थान के एक तीर्थयात्री हिम्मत सिंह शेरावत, जो केदारनाथ के लिए हेलीकॉप्टर सेवा लेने की योजना बना रहे थे कहा कि हम केदारनाथ मंदिर के लिए हेलीकॉप्टर सेवा लेने की योजना बना रहे थे, लेकिन स्थानीय लोगों ने बताया कि अक्सर दोपहर 2 बजे के बाद दृश्यता कम हो जाती है, जिससे हेलीकॉप्टर और यात्रियों के लिए खतरा बन जाता है।

कहा कि इसीलिए हमने मंदिर तक पैदल जाने का फैसला किया। केदारनाथ धाम के मंदिर के पुजारी आनंद शुक्ला ने कहा कि ज्यादातर हेलीकॉप्टर दुर्घटनाएं केदारनाथ क्षेत्र में खराब दृश्यता के कारण हुई हैं और प्रशासन को दोपहर 2 बजे के बाद हेलीकॉप्टर संचालन पर रोक लगा देनी चाहिए।

एनएस राजवार का कहना है कि हमने केदारनाथ के लिए हेलीकॉप्टर सेवा चलाने वाले नौ चॉपर ऑपरेटरों से सेवाओं के संचालन के दौरान अत्यधिक सावधानी बरतने और दोपहर 2 बजे के बाद संचालन से बचने के लिए कहा है क्योंकि कोहरा छा जाता है। विदित हो कि इस साल अप्रैल में रुद्रप्रयाग जिले के केदारनाथ में एक हेलीपैड पर हेलीकॉप्टर के टेल रोटर की चपेट में आने से उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (यूसीएडीए) के एक वरिष्ठ अधिकारी की मौत हो गई थी।

यह घटना उस समय हुई जब 37 वर्षीय अमित सैनी, जो कि यूसीएडीए के वित्त नियंत्रक थे, हेलीपैड के निरीक्षण के बाद हेलीकॉप्टर में चढ़ रहे थे।  मालूम हो कि चार धाम यात्रा के लिए हेली सेवाओं की बुकिंग इस साल 8 अप्रैल को आईआरसीटीसी की वेबसाइट – www.heliyatra.irctc.co.in के माध्यम से शुरू हुई। इस वर्ष राज्य सरकार ने इस सीजन में केदारनाथ के लिए संचालित हेलीकॉप्टर सेवाओं की बारीकी से निगरानी करने का भी निर्णय लिया था, जिसके लिए उसने रुद्रप्रयाग जिले में गुप्तकाशी से केदारनाथ तक प्रत्येक हेलीपैड के आसपास नौ सीसीटीवी कैमरे लगाने का निर्णय लिया था।

पिछले साल अक्टूबर में केदारनाथ क्षेत्र में एक चॉपर दुर्घटनाग्रस्त हो गया था जिसमें एक पायलट समेत सात श्रद्धालुओं की मौत हो गई थी। हेलीकॉप्टर दुर्घटना के बाद, उत्तराखंड सरकार के नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (यूसीएडीए) ने केदारनाथ क्षेत्र में हेली सेवाओं के संचालन की निगरानी के लिए एक हवाई यातायात नियंत्रण प्रणाली स्थापित करने के लिए नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) को लिखने का फैसला किया था।

आपको बता दें कि यात्रा अवधि के दौरान, हर दिन केदारनाथ क्षेत्र में हेलीकॉप्टर औसतन 400 उड़ानें भरते हैं। केदारनाथ क्षेत्र में पहले भी चॉपर दुर्घटनाग्रस्त होने की खबरें आ चुकी हैं। जून 2013 में, 2013 की केदारनाथ त्रासदी के दौरान बचाव अभियान चलाते समय तीन हेलिकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गए थे । इन दुर्घटनाओं में वायुसेना कर्मियों समेत 23 लोगों की मौत हो गई।

जुलाई 2103 में, बाढ़ प्रभावित केदारनाथ से उड़ान भरने के कुछ ही मिनटों बाद दुर्घटनाग्रस्त हो जाने से एक निजी हेलिकॉप्टर के पायलट और सह-पायलट की मौत हो गई। अप्रैल 2018 में, उत्तराखंड के केदारनाथ में उतरते समय भारतीय वायु सेना (आईएएफ) के मालवाहक हेलीकॉप्टर में आग लगने से एक व्यक्ति की मौत हो गई और तीन अन्य घायल हो गए।

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