उत्तराखंड के इस शहर में दिव्यांग नाबालिग छात्रों के साथ यौन शोषण मामले के बाद प्रदेशभर में सभी लोग दंग रह गए। आवासीय संस्थान में हुए इस घिनौने काम का खुलासा होने के बाद पुलिस भी दंग रह गई। लेकिन, हैरानी की बात है कि नाबालिग दिव्यांग छात्राओं के शर्मनाक प्रकरण में एक और हैरान करने वाला मामला सामने आया है।
मामला सामने के बाद अब कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं। नैनीताल जिले के हल्द्वानी में मूक बधिर एवं दृष्टिबाधित बच्चों की आवासीय संस्था के महासचिव श्याम सिंह धानक की गिरफ्तारी के सात दिन बाद ही मामले की जांच अधिकारी को लंबी छुट्टी चली गईं। अभी तक दूसरे जांच अधिकारी की भी नियुक्ति नहीं हुई।
इतने महत्वपूर्ण और गंभीर प्रकरण की जांच अधिकारी जांच के शुरुआत में ही छुट्टी जाने पर कानून से जुड़े लोग कई सवाल खड़े कर रहे हैं। लोगों का मानना है इससे जांच प्रभावित होगी। हालांकि पुलिस अधिकारी इसे सामान्य प्रक्रिया बता रहे हैं।
काठगोदाम थानाध्यक्ष ने एसएसपी को पत्र लिखकर नया जांच अधिकारी नियुक्त करने की बात कही है।
आवासीय संस्था में बच्चों के यौन उत्पीड़न के आरोपी श्याम सिंह धानक मामले की जांच अधिकारी को अचानक 15 दिन की लंबी छुट्टी दे दी गई। जबिक प्रकरण में अभी तक सभी पीड़िता बच्चों के बयान भी दर्ज नहीं हुए हैं।
पहले से मांगी थी छुट्टी तो दूसरे को क्यों नहीं दी जांच
इतने गंभीर मामले में जांच को बीच में छोड़ना पुलिस विभाग की लापरवाही को दिखा रहा है। यह बात आम पब्लिक से लेकर कानून व्यवस्था से जुड़े लोग कह रहे हैं। यहां तक कि अधिवक्ता ने इसे मामले की ढिलाई बताते हुए सवाल खड़े किए हैं।
अधिवक्ताओं का कहना है कि इतनी लंबी छुट्टी के लिए जांच अधिकारी ने पहले से आवेदन किया होगा। ऐसी स्थिति में या तो जांच उन्हें सौंपी नहीं जानी चाहिए थी। वहीं अगर जांच अधिकारी ने जांच मिलने के बाद छुट्टी के लिए आवेदन किया तो उच्चाधिकारियों को इतनी लंबी छुट्टी स्वीकृत न कर जांच को आगे बढ़ाना चाहिए था।
प्रांतीय नगर उद्योग व्यापार मंडल की ओर से मूक बधिर एवं दृष्टिबाधित बच्चों की आवासीय संस्था में बच्चों के यौन शोषण की वारदात की कड़ी निंदा करते हुए दूसरे दोषियों को भी सख्त सजा देने की मांग की है। मांग करने वालों में संगठन के प्रदेश महामंत्री राजेंद्र फर्स्वाण, प्रदेश संगठन प्रभारी वीरेंद्र गुप्ता, प्रदेश अध्यक्ष सुभाष मोंगा, संयोजक धर्म यादव, सह संयोजक देवेश अग्रवाल, प्रदेश कोषाध्यक्ष पूरन लाल साह, जिलाध्यक्ष राकेश गुप्ता आदि हैं।
पॉक्सो आदि के मामले फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलते हैं। गंभीर मामले में नए जांच अधिकारी की नियुक्ति किए बिना आईओ को छुट्टी देना गलत फैसला है। कहना था कि मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिल सके।
मूक बधिर एवं दृष्टिबाधित बच्चों की आवासीय संस्था के नए संचालक की बागडोर अब कौन संभालेगा इसे लेकर घमासान शुरू हो गया है। कई लोग सीट पर बैठकर नियंत्रण अपने हाथ में लेने की फिराक में हैं। इसके मुख्य कारणों में से एक कारण संस्था को मिलने वाली बड़ी फंडिंग भी बताई जा रही है। काठगोदाम थाना क्षेत्र स्थित मूक बधिर एवं दृष्टिबाधित बच्चों की आवासीय संस्था के महासचिव श्याम सिंह धानक की गिरफ्तारी के बाद अभी तक समिति नए संचालक का चुनाव नहीं कर पाई है।
बीते दिनों में हुई कमेटी की बैठक में कभी पूरे सदस्य नहीं पहुंचे तो कभी एकमत न होने से नए संचालक का चुनाव नहीं हो सका। अभी तक संस्था का पूरा कार्यभार संस्था की अध्यक्ष के हाथों में है, पर धानक की जगह कौन लेगा इसे लेकर चर्चा का बाजार गर्म है।
पुलिस को जल्द इसमें चार्जशीट फाइल करनी चाहिए।
ब्रिजेश बिष्ट, अधिवक्ता हल्द्वानी कोर्ट।
इतने गंभीर मामले में जांचाधिकारी का लंबी छुट्टी पर जाना गलत है। जांच में होने वाली देरी की वजह से केस में पीड़िताओं को मैनिपुलेट करने की कोशिश भी की जा सकती है।
सुचित्रा बेलवाल, अधिवक्ता हल्द्वानी कोर्ट।
यह सरासर पुलिस की लापरवाही है। यह निर्णय मामले की गंभीरता को कम करता है। इस तरह के मामलों में तेजी से जांच और कोर्ट में रिपोर्ट सबमिट करना बेहद जरूरी होता है।