शारदीय नवरात्र शुरू होते ही मंदिरों में श्रद्धालुओं का तांता लगना शुरू हो गया है। पहले दिन श्रद्धालुओं ने पवित्र नदियों में स्नान कर मां शैलपुत्री की विधि विधान से पूजा अर्चना कर नौ दिन के व्रतों का शुभारंभ किया। तीर्थ स्थानों पर देवी देवताओं के आयुधों को स्नान कराया गया। दिन भर मंदिरों में पूजा अर्चना व भजन कीर्तन का दौर चलता रहा। लोगों ने घरों में भी पूजा करवाई।
इससे पूर्व सुबह पवित्र नदियों में स्नान के लिए श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ पड़ा। रामेश्वर व पंचेश्वर घाट में सुबह चार बजे से ही श्रद्धालुओं ने डुबकी लगानी शुरू कर दी। देव डांगरों ने भी स्वयं स्नान कर देवी देवताओं के आयुधों को नहलाया।
लोहाघाट के ऋषेश्वर महादेव मंदिर, देवीधार, मां अखिलतारिणी मंदिर, झूमाधुरी मंदिर, सुंई के मां भगवती, आदित्य महादेव, मस्टा मंडली, गलचौड़ा बाबा, भगवती, नौल देवता, कैलबकरिया, वर्मा देवता, सिद्ध बाबा आदि मंदिरों में पूजा अर्चना के लिए भीड़ रही। विशुंग के मां कड़ाई देवी मंदिर में सुबह से शाम तक पूजा अर्चना का सिलसिला चलता रहा।
मां के जयकारों से गूंजा मंदिर
गुमदेश के चमू मंदिर, बाराकोट ब्लॉक के मां वरदायिनी व लड़ीधुरा मंदिरों में दुर्गा सप्तशती पाठ हुए। पाटी ब्लाक में खेतीखान के परघ्यानी मां भगवती मंदिर, एड़ी फटकशिला, मस्टा, महादेव फुटलिंग मंदिर, भागेश्वर मंदिर समेत सभी मंदिर मां के जयकारों से गुंजायमान रहे। चंपावत के मां चंपा देवी, हिंगला देवी, डिप्टेश्वर, बालेश्वर, नागनाथ, गोल्ज्यू आदि मंदिरों में भी पूजा अर्चना की गई। टनकपुर तथा बनबसा में भी लोगों ने मंदिरों में मां शैलपुत्री के स्वरूप की पूजा कर मन्नत मांगी।