नैनीताल के बलियानाला में हो रहे भूस्खलन को लेकर डीएम नैनीताल की ओर से पेश की गई स्टेटस रिपोर्ट से हाईकोर्ट नैनीताल संतुष्ट नहीं है। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति विपिन सांघी और न्यायाधीश न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की खंडपीठ ने मामले से जुड़ी जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए सीएम पुष्कर सिंह सरकार से जवाब पेश करने को कहा है।
कोर्ट ने फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट देहरादून से विषय विशेषज्ञों को कोर्ट के मार्गदर्शन के लिए भेजने के निर्देश सरकार को दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 17 अक्तूबर को होगी। मामले के अनुसार, नैनीताल निवासी अधिवक्ता सैय्यद नदीम मून ने 2018 में उच्च न्यायालय में जनहित दायर की थी।
इसमें कहा गया था कि नैनीताल का आधार कहे जाने वाले बलियानाले में हो रहे भूस्खलन से नैनीताल और इसके आसपास रह रहे लोगों को बड़ा खतरा हो सकता है। नैनीताल के अस्तित्व और लोगों को बचाने के लिए इसमें हो रहे भूस्खलन को रोकने के लिए कोई ठोस उपाय किया जाएं। साथ ही भूस्खलन को रोका जाए।
कुछ माह पूर्व ही राज्य सरकार ने बलियानाला ट्रीटमेंट के लि,ए योजना को स्वीकृति दी है। इस पर कोर्ट ने बीते दिनों डीएम नैनीताल से स्टेटस रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा था। सोमवार को प्रस्तुत रिपोर्ट देखने के बाद अदालत इससे संतुष्ट नहीं हुई। याचिकाकर्ता ने कहा कि यहां अधिकारी और नेता लगातार निरीक्षण करने जा रहे हैं। पर भूधंसाव रोकने के लिए अब तक कोई उपाय नहीं किया गया है।