श्रीनगर ब्यूरो । गढ़वाल विवि के चौरास परिसर स्थित एकेडेमिक सेंटर में ‘हिमालय है तो हम हैं’ विषय पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में वक्ताओं ने हिमालय संरक्षण, जैव-विविधता और भावी पीढ़ियों के लिए इसकी विरासत को सहेजने पर मंथन किया। इस मौके पर आयोजित तकनीकी सत्रों में ए विशेषज्ञों, शोधार्थियों व वक्ताओं ने हिमालय के संरक्षण के लिए ठोस नीति बनाए जाने की आवश्यकता बताईगढ़वाल विवि की ओर से आयोजित संगोष्ठी में मुख्य अतिथि व संगोष्ठी के सह समन्वयक चंदन सिंह बिष्ट ने कहा कि हमें पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रकृति के अनुकूल जीवनशैली को अपनाना ही होगा। संगोष्ठी से प्राप्त निष्कर्षों को एक प्रारूप में संकलित किया जाएगा। मुख्य वक्ता प्रो. आरके मैखुरी ने कहा कि आपदा जोखिम को कम करने के लिए सामुदायिक सहभागिता सबसे मजबूत हथियार है। प्रो. एमएस पंवार ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण तब तक अधूरा है जब तक युवा पीढ़ी इसमें सक्रिय भागीदारी न निभाएं। विशिष्ट अतिथि प्रो. महावीर सिंह नेगी व कुलसचिव प्रो. वाईपी रैवानी ने चिंता जताते हुए कहा कि पर्यावरणीय संकट लगातार बढ़ता जा रहा है जिसे नजरअंदाज करना घातक हो सकता है। कार्यक्रम की अध्यक्षता बिड़ला कैंपस निदेशक प्रो. हरिभजन सिंह चौहान ने की। प्रो. विजयकांत पुरोहित, डाॅ. कविता भट्ट, डा. धीरज कुमार, प्रो. अनिल नौटियाल, प्रो. रश्मि ढोडी, प्रो. बीपी नैथानी आदि मौजूद रहे।