फोटो-06 एच-संत सम्मेलन में मंचासीन संत एवं स्पीकर ऋतु खंडू़़ड़ी भूषण। ————————————- संत समाज हमारी धरोहर, उनका जीवन सभी के लिए प्रेरणास्रोतः विधानसभा अध्यक्ष – Vistrit News

फोटो-06 एच-संत सम्मेलन में मंचासीन संत एवं स्पीकर ऋतु खंडू़़ड़ी भूषण। ————————————- संत समाज हमारी धरोहर, उनका जीवन सभी के लिए प्रेरणास्रोतः विधानसभा अध्यक्ष

ऋषिकेश, ब्यूरो। हरिपुर कलां स्थित हरिसेवा आश्रम ट्रस्ट के वार्षिकोत्सव के उपलक्ष में आयोजित संत सम्मेलन एवं भागवत कथा के दौरान उत्तराखंड विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूडी भूषण ने उपस्थित सभी प्रमुख धर्माचार्य, अखाड़ों के संत, महंत एवं महामंडलेश्वर का आशीर्वाद प्राप्त कियाद्य
इस दौरान संत समाज द्वारा ऋतु खंडूडी का सम्मान भी किया गया।
        इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि संत समाज हमारी धरोहर हैं, वह किसी एक जाति समुदाय के नहीं बल्कि समस्त मानव जाति के कल्याण के लिए अपना संदेश देते हैं। उन्होने कहा की हमारे देश, हमारे समाज की एक विशेषता रही है कि उसमें आंतरिक कमजोरियों, आंतरिक बुराइयों को दूर करने की प्रक्रिया भी साथसाथ चलती रहती है। इस प्रक्रिया को तेज करने के लिए, समयसमय पर संतऋषिमुनि, महान आत्माएं अवतरित होती रही हैं। ये पुण्य आत्माएं समाज को इन बुराइयों से मुक्त करने के लिए अपना जीवन खपा देती हैं।
       विधानसभा अध्यक्ष ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन में साधुसंत जुट कर भविष्य के लिए समाज की दिशा क्या होगी, देश की दिशा क्या होगी, समाज की कार्यशैली में किस तरह का बदलाव किया जाएगा इस पर मंथन करते है।
उन्होंने कहा की संत महापुरुषों का जीवन हम सभी के लिए प्रेरणास्रोत रहा। हमें देश के सम्मानित पदों पर रहते हुए भी समाज सेवा से जुड़े रहना चाहिए, समाज सेवा सामाजिक कार्यक्रमों में बढ़चढ़ कर भाग लेना चाहिए। हमारा देश अध्यात्म संस्कृति के बल पर आगे रहा है और बढ़ता रहेगा। उन्होने कहा की हरिसेवा आश्रम ट्रस्ट दीनदुखी असहाय, वंचित, गरीब की सेवा के क्षेत्र में हमेशा से ही सहभागिता निभाता चला रहा है। ट्रस्ट द्वारा लॉकडाउन अवधि में भी गरीब असहाय लोगों की सेवा की गई थी। इस अवसर पर पतंजलि योगपीठ के आचार्य बालकृष्ण, महेंद्र रघु मणि, जगतगुरु राजराजेश्वर, महामंडलेश्वर ललितानंद, महंत कमल दास, हरिचेतनानंद जी महाराज, अचोता नंद महाराज, शिवानंद महाराज, जोगितानंद महाराज सहित सैकड़ों की संख्या में संत समाज मौजूद था।

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