हरिद्वार के लक्सर की जनता पहले बाढ़ से परेशान थी और अब डेंगू से। लक्सर क्षेत्र में डेंगू का डंक एक बार फिर डराने लगा है। क्षेत्र में डेंगू के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। निजी अस्पतालों में डेंगू पीड़ित उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। क्षेत्र में अभी तक दो दर्जन से अधिक डेंगू के मामले सामने आ चुके हैं। जिनमे चौदह मरीजों को डेंगू की पुष्टि हो चुकी है। जिनमे 10 मामले नगर पालिका क्षेत्र तथा चार मामले देहात क्षेत्र के शामिल है।
लक्सर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को मरीजों के सही आंकड़े की जानकारी नहीं है। हर साल इन दिनों डेंगू के मामले बढ़ने लगते हैं। इस साल भी डेंगू ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है। बाढ़ प्रभावित लक्सर व खानपुर क्षेत्र को मलेरिया व डेंगू के हिसाब से संवेदनशील व अति संवेदनशील क्षेत्र मे रखा गया है। नगर व ग्रामीण क्षेत्र में डेंगू के मामले लगातार सामने आ रहे हैं।
सामने आए डेंगू के डराने वाले मामले
क्षेत्र में अभी तक दो दर्जन से अधिक डेंगू के मामले सामने आए हैं। डेंगू पीड़ित उपचार के लिए अस्पताल पहुंच रहे हैं। हालांकि अधिकांश व्यक्ति निजी अस्पतालों में अपना उपचार करा रहे हैं। इससे स्वास्थ्य विभाग के पास डेंगू पीड़ितों का सही आंकड़ा नहीं है। लक्सर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉक्टर नलिंद असवल ने बताया कि अभी तक क्षेत्र में डेंगू के 23 मामले सामने आए हैं। जिनमें से तीन मे डेंगू की पुष्टि हो चुकी है। अन्य के सैंपल एलाइजा जांच के लिये भेजे गए हैं।
डोर टू डोर हो रहे सर्वे
जबकि विभाग के जनपदीय अधिकारियों के अनुसार लक्सर में अभी तक तक नगर पालिका क्षेत्र में 10 तथा ग्रामीण क्षेत्र में चार मरीजों में डेंगू की पुष्टि हो चुकी है। डॉ नलिंद असवाल के अनुसार लक्सर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर छह बैंड का डेंगू वार्ड बनाया गया है। इसके अलावा डोर टू डोर सर्वे कराकर बुखार पीड़ितों को चिन्हित किया जा रहा है। लक्सर में आदर्श कॉलोनी व केशव नगर में शिविर लगाकर लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया है।
पानी जमा होने बढ़ रही मक्खी-मच्छरों की संख्या
निजी चिकित्सकों के अनुसार बुखार के रोगियों की संख्या बढ़ रही है। रोगियों की जांच कराने पर डेंगू के मामले सामने आ रहे हैं। वही क्षेत्र के लोगों का आरोप है कि आबादी क्षेत्र के इर्द-गिर्द पानी जमा होने के चलते मक्खी मच्छरों की तादाद लगातार बढ़ रही है। स्वास्थ्य विभाग तथा प्रशासनिक अमला इस ओर से लापरवाह बना हुआ है। कीटनाशक का छिड़काव न होने के कारण डेंगू, मलेरिया व संक्रमित रोगों के फैलने की आशंका अधिक बढ़ गई है।