देश में बाघों की संख्या बढ़ने का जश्न मनाए अभी दो महीने भी नहीं बीते कि जंगल से चिंता में डालने वाली खबर बाहर आई है। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण-एनटीसीए के आंकड़े कह रहे हैं, बाघ बढ़ाने में तो हमने जबरदस्त सफलता पाई, लेकिन संभालने में चूक हो रही है।
यही वजह है पिछले एक दशक में सालभर में मरने वाले बाघों की संख्या इस बार सबसे ज्यादा है। जबकि अभी साल पूरा होने में तीन महीने शेष हैं। एनटीसीए के आंकड़े बताते हैं कि इस साल 2013 की तुलना में दोगुने से ज्यादा बाघों की मौत हो चुकी है। हालांकि बीच के सालों में ये संख्या बढ़ती-घटती रही है, लेकिन पिछले एक दशक में किसी साल 2023 के बराबर बाघों की मौत नहीं हुई।
इस साल नौ महीनों में ही ये आंकड़ा 146 पहुंच गया है। 2013 में ये संख्या महज 68 थी। विशेषज्ञ इसके पीछे बाघों की बढ़ती संख्या और सिमटते दायरे को सबसे बड़ी वजह मानते हैं। वनाधिकारियों के मुताबिक इस साल जो बाघ मारे गए हैं, उसमें 80 फ़ीसदी से ज्यादा मौतें आपसी संघर्ष की वजह से हुई हैं। मारे गए बाघों में ज्यादातर उम्र पूरी कर चुके या कमजोर हैं।