उत्तराखंड में रविवार का दिन हादसों का दिन रहा है। प्रदेश के विभिन्न शहरों में पांच अलग-अलग हादसों में 12 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। सड़क हादसे में 33 लोग घायल भी हुए हैं। सड़क हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस और एसडीआरएफ की टीमों द्वारा राहत व बचाव कार्य किया गया। घायलों को रेस्क्यू कर नजीदीकि अस्पताल में भर्ती करवाया गया।
उत्तराखंड के नैनीताल, पिथौरागढ़ और ऊधमसिंहनगर जिलों में हुए पांच अलग-अलग सड़क हादसों में 12 लोगों की मौत हो गई। जबकि, 33 लोग घायल हो गए। धारचूला में मलबे में दबे आठ लोगों का अंधेरा अधिक होने के कारण रेस्क्ूय नहीं हो सका। जानकारी के अनुसार, हरियाणा के हिसार से 32 शिक्षकों का एक दल शनिवार को नैनीताल घूमने पहुंचा था।
रविवार शाम को अपना टूर खत्म करने के बाद शिक्षक बस से ही वापस लौटने लगे। नैनीताल से आगे कालाढूंगी रोड पर घटगढ़ के समीप पहुंचते ही रात करीब छह बजे बस अचानक अनियंत्रित होकर गहरी खाई में जा गिरी। सूचना पाकर मौके पर पहुंची एसडीआरएफ और पुलिस ने रेस्क्यू अभियान चलाया। जिसके बाद घायलों को कालाढूंगी स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया।
ब्रेक फेल होने से खाई में गिरी बस कालाढूंगी के घटघड़ में ब्रेक फेल होने की वजह से दर्दनाक हादसा हुआ। दूसरे चालक कपिल की मानें तो अचानक बस के ब्रेक का प्रेशर खत्म हो गया। बस की रफ्तार कम करने के लिए उन्होंने गेयर कम कर हैंड ब्रेक लगाना चाहा, लेकिन उसने भी काम नहीं किया। काफी प्रयास के बाद भी अनियंत्रित बस को काबू नहीं कर सके। वहीं, केंद्रीय रक्षा एवं पर्यटन राज्य मंत्री अजय भट्ट ने फोन पर प्रशासन और पुलिस अधिकारियों से घायलों का हाल जाना।
धारचूला-लिपुलेख राष्ट्रीय राजमार्ग पर बूदी से करीब चार किमी पहले कोथला झरने के पास पहाड़ से चट्टान का बड़ा हिस्सा टूटकर चलती जीप के ऊपर गिर गया। हादसे में जीप में सवार नौ लोग मलबे के ढेर में दब गए।
घंटों चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद टीम को एक व्यक्ति का शव मलबे से बरामद हुआ है, जिसकी शिनाख्त नहीं हो सकी है। मलबे में अभी भी आठ लोगों के दबे होने की संभावना जताई जा रही है। मलबे में लापता लोगों में तीन बच्चे, एक सेवानिवृत्त शिक्षक दंपति और नेपाली मजदूर बताए जा रहे हैं।