केबल उपभोक्ताओं पर दोहरी मार पड़ रही है। एक ओर केबल कंपनियों ने चैनल के मासिक बिल में आठ से दस फीसदी बढोत्तरी कर दी है। वहीं यूपीसीएल द्वारा स्मार्ट सिटी के तहत बिजली के पोलों पर से अवैध रुप से लगी केबल काटने से केबल प्रसारण में बार-बार बाधा आ रही है। केबल ऑपरेटरों में उपभोक्ताओं को सेवाएं देने में पसीने छूट रहे हैं।
एशियाई खेल और क्रिकेट विश्व कप के मैच शुरू होने के बाद उपभोक्ताओं का प्रेशर कई गुना बढ़ गया है।
दून में उत्तरांचल केबल नेटवर्क के हजारों उपभोक्ताओं के मासिक बिल में आठ से दस फीसदी तक बढोत्तरी हुई है। डेन, ब्लू स्काई नेटवर्क व सिटी केबल नेटवर्क के उपभोक्ताओं पर भी बढ़ी हुई मासिक दरों का दबाव है।
यूसीएन के विनय उनियाल ने बताया कि एचडी पैक 410 की बजाय 440 तक पहुंच गया है। गोल्ड पैक में भी 18 रुपये की बढोत्तरी हुई है। डेन के उत्तराखंड प्रमुख संतोष सकलानी के अनुसार ट्राई के नए प्रावधान एनटीओ 3.0 लागू होने से सभी पर दरें बढ़ाने का दबाव बढ़ा है।
वहीं इन दिनों शहर में बिजली के पोलों से काटी जा रही केबल व दूर संचार नेटवर्क की केबल के अभियान ने मल्टी सिस्टम ऑपरेटर-एमएसओ समेत अन्य केवल ऑपरेटर्स की चिंताएं बढ़ा दी है। यूपीसीएल ने प्रति पोल कंपनियों से सौ रुपए प्रतिवर्ष वसूलने का फरमान जारी किया है। जिसके बाद कईयों ने पैसे जमा भी कराए हैं। जिन्होंने अभी तक यूपीसीएल में पैसे जमा नहीं कराए उनकी केबल काटी जा रही हैं
पैसे जमा कराने के बावजूद काट रहे केबल
यूसीएन के विनय उनियाल ने बताया कि उन्होंने शहर के 1100 से अधिक पोल पर केबल लगाने की एवज में कुल 2.26 लाख रुपये जमा कराए हैं। वहीं डेन के संतोष सकलानी ने बताया कि डेन ने भी 1945 पोल के लिए ढाई लाख रुपये से अधिक जमा कराया है। इसके बावजूद उनकी केबलें काटी जा रही। इससे चार-चार घंटे प्रसारण ठप हो रहा है।
यूपीसीएल की बढ़ रही कमाई
बिजली के पोल पर केबल से शुल्क वसूलने का आइडिया आने के बाद जियो रिलायंस, भारती एयरटेल, टेलीकॉम नेटवर्क, विंध्या टेलीलिक्स, पावर ग्रिड कॉरपोरेशन, टेलीसॉनिक, रेटेल कॉपपोरेशन जैसी 21 नेट प्रदाता कंपनियों ने यूपीसीएल में प्रति पोल के हिसाब से करोड़ों रुपये जमा कराए हैं।
दून में बिजली के पोलों पर अवैध रुप से लगी केबल हटाने का काम शुरू हो गया है। हम बिजली के पोलों को व्यवस्थित करना चाहते हैं। जल्द ही यह अभियान पूरे प्रदेश में चलेगा। सिर्फ उन्हीं की केबल लगने दी जाएगी जो शुल्क जमा करेंगे।
इसके लिए प्रति पोल 100 रुपये शुल्क तय किया गया है। तारों के जाल में यह बताना मुश्किल है कि किस नेटवर्क की तारें कट रही हैं, ऐसे में अभियान के दौरान सम्बंधित कंपनियों के प्रतिनिधियों को मौके पर बुलाकर तार हटाई जा रही है।