कॉर्बेट नेशनल पार्क में पिछले करीब पांच दशक से वन्यजीव व वनों की सुरक्षा में अहम योगदान देने वाली 66 साल की हथिनी गोमती को रिटायर कर दिया गया है। आदमखोरों को पकड़ने के कई बड़े ऑपरेशन में शामिल रही गोमती के सराहनीय कार्यों को देखते हुए उसे मेडल व माला पहनाकर एक कर्मचारी की तरह विदाई दी गई।
इस दौरान विभाग के अधिकारी, महावत और कार्यक्रम में पहुंचे स्कूली बच्चे भी भावुक दिखे। गोमती के साथ ही खोजी कुत्ते ब्रान्डी की उम्र 12 साल पूरी होने पर उसे भी आराम दिया गया है। विधायक दीवान सिंह बिष्ट भी गोमती को विदाई देने पहुंचे थे। पार्क के निदेशक डॉ. धीरज पांडे ने बताया कि गोमती को लखनऊ से यहां लाया गया था।
रेंजर बिंदर सिंह ने बताया कि गोमती ने सुंदरखाल, ढिकाला समेत कई जगह आदमखोर बाघों का सुराग लगाया। वह रोजाना 15 से 20 किमी गश्त करती थी। वहीं ब्रान्डी कई सर्च ऑपरेशन में मदद कर चुका है। रिटायर हो रही गोमती, ब्रान्डी को पार्क में ही रखा जाएगा।
संजय छिम्वाल ने विदाई पत्र पढ़ा। यहां भाजपा नगराध्यक्ष मदन जोशी, जगमोहन बिष्ट, उप निदेशक दिगंत नायक, वार्डन अमित ग्वासीकोटी, वन्यजीव डॉ. दुष्यंत कुमार, डॉ. एचएस बरगली आदि रहे।
गोमती का रिटायर होना महावत सूबेदार अली के लिए भावुक पल था। उन्होंने बताया, कई साल पहले ढिकाला में एक बाघ ने उन पर हमला कर दिया था। तभी पीछे से आई गोमती ने बाघ को उठाकर फेंक दिया।
उन्हें अपनी पीठ पर बिठाकर दो घंटे के सफर को 20 मिनट में पूरा कर ढिकाला कैंपस पहुंचा दिया। कार्यक्रम में महावत सूबेदार अली, निसार अली, फारुख खां के साथ खोजी कुत्ते की देखरेख में लगे अजीत चौहान, वन आरक्षी, विजय बंगारी, पवन पपनै को सम्मानित किया गया।