अल्मोड़ा ब्यूरो के एसएसजे विश्वविद्यालय में 240 युवाओं पर हुए शोध में सूर्य नमस्कार, मंत्र-जप और प्राणायाम के मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव का अध्ययन किया गया। शोध में चार मनोवैज्ञानिक आयामों में महत्वपूर्ण अंतर सामने आया।आधुनिक जीवनशैली, बढ़ती प्रतिस्पर्धा और सामाजिक-आर्थिक दबावों के बीच युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़ रही है। ऐसे समय में अल्मोड़ा में मनोविज्ञान के क्षेत्र में हुआ एक शोध योगिक क्रियाओं की मानसिक स्वास्थ्य संवर्धन में संभावित उपयोगिता को सामने लाता है।अध्ययन में सूर्य नमस्कार, मंत्र-जप और प्राणायाम के अभ्यास का युवाओं के अवसाद, तन्यता, मनोवैज्ञानिक स्वस्तिबोध और संवेगात्मक क्षमता पर प्रभाव देखा गया। यह शोध सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय अल्मोड़ा की प्रो. मधुलता नयाल के निर्देशन में डॉ. रजनीश जोशी ने किया।अध्ययन में उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल के अल्मोड़ा जिले के 18 से 35 वर्ष आयु वर्ग के 240 युवाओं को शामिल किया गया। प्रतिभागियों को 120-120 के दो समूहों प्रयोगात्मक और नियंत्रित में विभाजित किया गया। सभी प्रतिभागी ऐसे युवा थे, जो इससे पहले नियमित योगाभ्यास नहीं करते थे।